भारत में मधुमेह को लेकर सबसे बड़ी चुनौती जागरूकता की कमी है। भारत में 48% मधुमेह रोगियों को पता ही नहीं होता कि उनमें मधुमेह के लक्षण हैं। कई लोग अभी भी मिथकों में विश्वास करते हैं और उन्हें मधुमेह के कारणों और लक्षणों के बारे में उचित जानकारी नहीं है।
कई शोध अध्ययनों ने यह साबित किया है कि विशेष रूप से टाइप 2 मधुमेह (Type 2 diabetes) को अच्छी तरह से प्रबंधित किया जा सकता है यदि इसका जल्दी निदान (diagnosis) किया जा सके और इसका इलाज सुनियोजित तरीके से किया जाये | इसलिए मधुमेह के प्रबंधन के लिए शीघ्र निदान (diagnosis) आवश्यक है। यह उचित जागरूकता के माध्यम से किया जा सकता है।
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